Amit shah Lok Sabha Speech: गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एक भी बजट, विधेयक पर चर्चा में राहुल गांधी ने भाग नहीं लिया और उनकी पार्टी चार दशक बाद ऐसा प्रस्ताव लेकर आई है.
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हुआ. इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चीन को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों पर जवाब दिया. राहुल गांधी का नाम लिए बिना गृह मंत्री ने कहा कि डोकलाम के समय जब हमारी और चीन की सेना आमने-सामने थी तो विपक्ष के नेता चीन के दूतावास में गुप्त मीटिंग कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इनके रक्षा मंत्री ने देश की संसद में कहा कि सीमा पर सड़क बनाएंगे तो दुश्मन अंदर आ जाएगा.
कांग्रेस के समय अक्साई चीन को हड़पा गया: अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी के समय अक्साई चीन को हड़पा गया. तब नेहरू जी ने जवाब दिया वहां घास का तिनका भी नहीं उगता. 2005-06 में राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी दूतावास से एक करोड़ 35 लाख का दान मिला. इनका एफसीआरए का लाइसेंस रद्द कर दिया गया. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ कांग्रेस ने एमओयू किया, वह घोषित करें कि क्या था.’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता. इस पर गृह मंत्री ने कहा कि बोलने के वक्त वे विदेश में घूमते हैं. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी को मैं बताना चाहता हूं कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को 157 घंटे और 55 मिनट का समय दिया गया, जबकि उनके 52 सदस्य थे. इसकी तुलना में बीजेपी को 349 घंटे और 8 मिनट दिए गए, जबकि हमारी सदस्य संख्या 303 थी.’
बोलने के समय विदेश चले जाते हैं: अमित शाह
उन्होंने कहा, ’18वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी द्वारा कल तक 71 घंटे बोला गया, जबकि उनके पास 99 सदस्य हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी को 122 घंटे मिले हैं, जबकि हमारे 239 सदस्य हैं. इसमें भी कांग्रेस पार्टी को बीजेपी से दोगुना समय मिला, लेकिन ये कहते हैं कि हमें बोलने का मौका नहीं दिया गया… बोलने के समय तो इनके नेता जर्मनी और इंग्लैंड होते हैं.’
स्पीकर की निष्ठा पर विपक्ष ने सवाल उठाया: अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘विद्यमान स्पीकर की नियुक्ति तब हुई, तब दोनों दलों के नेता ने एक साथ उन्हें आसन पर बैठाने का काम किया. इसका मतलब है कि स्पीकर को अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों ने एक प्रकार से मुक्त माहौल भी देना है और दायित्वों के निर्वहन के लिए उनका समर्थन भी करना है. स्पीकर के निर्णय पर कोई असहमति तो व्यक्त हो सकती है, लेकिन लोकसभा के नियमों में स्पीकर के निर्णयों को अंतिम माना गया है. इसके उलट विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया.’

