US Israel War Iran: अमेरिका और इजरायल की ईरान से जंग 7वें दिन भ जारी है. अमेरिका के सपोर्ट में कई समर्थक देश खड़े हो गए, लेकिन ईरान अकेला पड़ गया है. रूस और चीन ने कोई सैन्य मदद नहीं की है.
अमेरिका और इजरायल से युद्ध में ईरान अकेला पड़ गया है. अमेरिका और इजरायल के भीषण हमलों के बीच उसके पुराने सहयोगी रूस और चीन सिर्फ कड़ी निंदा और UN सिक्योरिटी काउंसिल में मीटिंग की मांग तक सीमित हैं. सैन्य मदद या कोई बड़ा सपोर्ट नहीं मिल रहा. इसकी 4 बड़ी वजहें सामने आती हैं…
1. रूस सीधे जंग में नहीं कूदना चाहता
रूस और ईरान के बीच 2025 में रणनीतिक साझेदारी का समझौता हुआ था, लेकिन यह सैन्य गठबंधन नहीं है. इस वजह से रूस पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं है. रूस खुद को मध्यस्थ (मीडिएटर) की भूमिका में रखना चाहता है, न कि नए फ्रंट पर जंग लड़ना. क्रेमलिन प्रवक्ता ने कहा, ‘ईरान ने हमसे हथियार मांगे ही नहीं.’ रूस यूक्रेन जंग में पहले से फंसा है, इसलिए नया टकराव नहीं चाहता.
2. चीन अपने आर्थिक हितों पर जोखिम नहीं लेना चाहता
चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, लेकिन सऊदी अरब और UAE जैसे गल्फ देशों से भी मजबूत आर्थिक रिश्ते हैं. अगर ईरान का खुलकर साथ दिया तो गल्फ देशों से दूरी हो सकती है. चीनी एक्सपर्ट युन सुन ने कहा, ‘हमले के बाद जो भी नई लीडरशिप आएगी, चीन उसके साथ काम करने को तैयार है. बशर्ते तेल का फ्लो चले और आर्थिक हित सुरक्षित रहें.’ अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहा तो चीन को मजबूरन कुछ करना पड़ सकता है, लेकिन फिलहाल नहीं.
3. पश्चिम एशिया में संतुलन बनाए रखना
रूस और चीन ईरान के साथ-साथ उसके विरोधियों के साथ भी संतुलन चाहते हैं. किसी एक पक्ष से पूरी तरह जुड़ने से अन्य पार्टनर्स नाराज हो सकते हैं. दोनों देश अमेरिका से सीधा टकराव नहीं चाहते. इस वजह से खुलकर ईरान के साथ मैदान में नहीं उतर रहे.
4. अमेरिका से वैश्विक टकराव का खतरा
सैन्य मदद देने से अमेरिका के साथ बड़ा टकराव हो सकता है, जो दोनों देशों के लिए महंगा पड़ सकता है. इसलिए वे कूटनीतिक बयानों, निंदा और UN में मीटिंग की मांग तक सीमित हैं. रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमलों से तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं हैं.
आयतुल्लाह खामेनेई की मौत से शुरू हुई जंग
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले किए, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई. ईरान ने जवाब में मिसाइल और ड्रोन अटैक्स किए. लेकिन अब ईरान अकेला लड़ रहा है. रूस-चीन की दूरी से उसकी स्थिति और कमजोर हुई है. अगर युद्ध लंबा चला और तेल सप्लाई प्रभावित हुई तो चीन को अपनी पॉलिसी पर फिर सोचना पड़ सकता है.
फिलहाल रूस और चीन सिर्फ बातें कर रहे हैं, कोई एक्शन नहीं. ईरान के लिए यह बड़ा झटका है और क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है.

