US Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर मिसाइल से हमला किया है. इस वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद रेड शी पर खतरा मंडराने लगा है.
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच हूी विद्रोहियों ने शनिवार (28 मार्च 2026) को इजरायल पर मिसाइल हमला किया जिससे मिडिल ईस्ट में भारी हलचल पैदा हो गई. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दबाव बनाए हुए है, जिससे दुनिया के एक बड़े बिजनेस रुट पर असर पड़ा है. हूतियों ने कहा कि उन्होंने दक्षिणी इजरायल में महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई मिसाइलें दागी हैं. हालांकि, इजरायली सेना ने बताया कि उसने यमन से दागी गई मिसाइल को हवा में तबाह कर दिया. इजरायल की सेना के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने कहा कि देश अब एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध की तैयारी कर रहा है.
हूती विद्रोही ईरान के करीबी सहयोगी माने जाते हैं और वे उस समूह का हिस्सा हैं जिसे Axis of Resistance कहा जाता है. इस समूह में लेबनान, इराक और फिलिस्तीन के कई संगठन शामिल हैं. यमन में हूती विद्रोही राजधानी सना और देश के उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं और 2014 से वहां गृह युद्ध चल रहा है. पहले एक महीने तक उन्होंने इस संघर्ष में सीधी भागीदारी नहीं की थी, लेकिन अब उनके हमले से चिंता बढ़ गई है.
रेड शी में जहाजों को निशाना बना सकते हैं हूती
सबसे बड़ी चिंता यह है कि हूती अब रेड शी में जहाजों को निशाना बना सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो दुनिया के व्यापार और तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा. पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट के कारण बाजार और तेल की कीमतें प्रभावित हो चुकी हैं. हूतियों के प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा है कि वे अमेरिका और इजरायल को रेड सी का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं करने देंगे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर रेड सी में हमले बढ़ते हैं तो तेल की कीमतें और बढ़ेंगी और समुद्री सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ेगा.
बाब अल-मंडेब पर खतरे के बादल
रेड शी में मौजूद बाब अल-मंडेब, जो दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापार मार्गों में से एक है. ये खतरे में आ सकता है. यह रास्ता स्वेज नहर से जुड़ा हुआ है और दुनिया के करीब 12% व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यह रास्ता बंद होता है तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाना पड़ेगा, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाएंगे. इसका असर खासतौर पर यूरोपीय संघ जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा, जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर हैं. पहले भी हूती विद्रोहियों ने 2023 से 2025 के बीच 100 से ज्यादा जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए थे, जिससे कई जहाज डूब गए और लोगों की जान भी गई थी.

