ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नया बड़ा कदम उठाया है. ईरानी संसद अब एक बिल बनाने की तैयारी कर रही है, जिसमें स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल (फीस) वसूलने का प्रावधान होगा. सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, संसद का एक विधायक ने बताया कि अगले हफ्ते तक यह प्रस्ताव अंतिम रूप ले सकता है. इससे ईरान को होर्मुज पर अपना कानूनी नियंत्रण मजबूत करने के साथ-साथ अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा.
होर्मुज स्ट्रेट के मौजूदा हालात क्या हैं?
US-इजरायल ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने कुछ जहाजों से अनौपचारिक रूप से फीस मांगना शुरू कर दिया है. कुछ मामलों में एक जहाज से 20 लाख डॉलर यानी करीब 17 करोड़ रुपये तक की मांग की गई है. अब इसे कानूनी रूप देने की कोशिश चल रही है. ईरान का कहना है कि यह ‘सुरक्षित गुजर’ के बदले लिया जाएगा.
दुनिया पर क्या असर?
होर्मुज से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है. युद्ध शुरू होने के बाद टैंकर ट्रैफिक कम हो गया है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं. अगर टोल लगा तो शिपिंग कंपनियों का खर्च बढ़ेगा, जिसका असर तेल, गैस और उर्वरक की कीमतों पर पड़ेगा.
भारत सरकार का साफ जवाब
भारत के शिपिंग मंत्रालय ने इन रिपोर्ट्स को ‘बेबुनियाद’ बताया है. स्पेशल सेक्रेटरी राजेश सिन्हा ने कहा, ‘होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य है. अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार यहां फ्रीडम ऑफ नेविगेशन है और कोई भी टोल या लेवी नहीं लगाई जा सकती है, इसलिए ऐसा कोई भी दावा बेबुनियाद है.’
भारत होर्मुज के रास्ते अपनी बड़ी तेल और LPG जरूरतें पूरी करता है. हाल ही में ईरान ने भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और इराक जैसे मित्र देशों के जहाजों के लिए स्ट्रेट खोल दिया था, लेकिन टोल वाली खबर से आयात महंगा हो सकता है. रिलायंस जैसी कंपनियां ईरानी तेल खरीद रही हैं, इसलिए सरकार सतर्क है. ईरान का यह कदम युद्ध के दौरान अपनी मजबूत स्थिति दिखाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे विवादास्पद माना जा रहा है.

